सऊदी अरब का ‘विज़न 2030’ देश की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर पर्यटन, तकनीक और व्यापार के वैश्विक केंद्र में बदलने का एक महत्वाकांक्षी खाका है। इस विशाल योजना के केंद्र में दो सबसे बड़े प्रोजेक्ट हैं रेगिस्तान में बसने वाला स्मार्ट शहर ‘द लाइन’ और दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बनने जा रहा ‘जेद्दा टावर’ ।
लेकिन विशाल बजट, निर्माण की व्यावहारिक जटिलताओं और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच इन परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति क्या है?
सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिम में नियोम मेगासिटी के तहत बनने वाला ‘द लाइन’ एक ऐसा शहर है जिसे बिना कारों, सड़कों या कार्बन उत्सर्जन के डिज़ाइन किया गया है। शुरुआत में घोषणा की गई थी कि 2030 तक 170 किलोमीटर लंबे और 500 मीटर ऊँचे शीशे के ढाँचे में लगभग 15 लाख लोग रहने लगेंगे।
2024 की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार, वित्तीय प्राथमिकताओं और निर्माण की व्यावहारिक गति को देखते हुए प्रोजेक्ट को पैमाने को अब छोटा कर दिया गया है।
अब लक्ष्य यह है कि 2030 तक इस शहर का लगभग 2.4 किलोमीटर का हिस्सा पूरा कर लिया जाए, जहाँ लगभग तीन लाख लोगों के रहने की उम्मीद है। 170 किलोमीटर का पूरा ढाँचा आने वाले दशकों में चरणबद्ध तरीके से तैयार होगा।
संशोधित योजना के मुताबिक, 2030 तक 170 किलोमीटर के बजाय केवल 2.4 किलोमीटर का हिस्सा ही पूरा किया जाएगा। 2030 तक शहर में 15 लाख लोगों के रहने के शुरुआती अनुमान को घटाकर अब लगभग तीन लाख कर दिया गया है। बाकी के 170 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण आने वाले कई दशकों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
दुनिया के सबसे ऊँचे जेद्दा टावर का काम कहाँ तक पहुँचा?
जेद्दा में बन रहा ये टावर एक हज़ार मीटर ऊंचा होगा जो कि दुबई की बुर्ज खलीफा जिसकी ऊंचाई 828 मीटर है को पछाड़कर दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बन जायेगा।
इस टावर का निर्माण कार्य साल 2018 में 63वीं मंज़िल तक पहुँचने के बाद आंतरिक वित्तीय और प्रशासनिक कारणों से रुक गया था।

लंबे समय तक बंद रहने के बाद, 2023 के अंत में इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने की निविदाएँ जारी की गईं और 2025 की शुरुआत से निर्माण कार्य पूरी गति से रीस्टार्ट हो चुका है।
निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ते हुए 100 से अधिक मंज़िलों का आंकड़ा पार कर चुका है और इसकी ऊँचाई 400 मीटर से ऊपर पहुँच चुकी है। कंक्रीट पोरिंग और विशेष ग्रेड स्टील स्ट्रक्चर का काम लगातार जारी है। डेवलपर्स का लक्ष्य इस मेगा-स्ट्रक्चर को 2028 तक पूरी तरह से तैयार करने का है।
इसमें जमीन से लगभग 2,140 फीट की ऊंचाई पर एक खुला स्काई टेरेस ऑब्जर्वेशन प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। 98 फीट व्यास वाले इस गोलाकार टेरेस को शहर और लाल सागर का 360-डिग्री पैनोरमिक व्यू देने के लिए डिजाइन किया गया है।
इसमें लग्जरी अपार्टमेंट्स, प्रीमियम ऑफिस स्पेस, एक फोर सीजन्स होटल और रिटेल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स शामिल होंगे।
फीफा वर्ल्डकप और रियाद एक्सपो पर भी नज़र
सऊदी अरब द्वारा अपनी परियोजनाओं के बजट और समयसीमा को फिर से व्यवस्थित करने की बड़ी वजहों में आगामी अंतरराष्ट्रीय आयोजन भी हैं। देश में ‘ दो विशाल इवेंट्स आयोजित होने हैं, जिन पर अब सऊदी सरकार का पूरा ध्यान केंद्रित है।
इसमें पहला सऊदी अरब द्वारा वर्ल्ड एक्सपो 2030 की मेज़बानी है, जिसके लिए रियाद में बड़े पैमाने पर ट्रांसपोर्ट और हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
इसके बाद सऊदी अरब आधिकारिक तौर पर 2034 फीफा वर्ल्ड कप की मेज़बानी करने जा रहा है।
वर्ल्ड कप की बिड बुक के अनुसार, NEOM के भीतर एक अनोखा ‘नियोम स्टेडियम’ बनाया जाएगा। यह स्टेडियम ज़मीन से 350 मीटर से भी अधिक की ऊँचाई पर ‘द लाइन’ के बुनियादी ढाँचे का हिस्सा होगा, जिसकी क्षमता 46,000 से अधिक दर्शकों की होगी। इसके अलावा रियाद, जेद्दा और अल-खोबार में भी नए स्टेडियम बनाए और अपग्रेड किए जा रहे हैं।