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अमेरिका: दो ज़हरीले इंजेक्शन के बाद भी ज़िंदा बची सज़ा-ए-मौत पाने वाली क़ैदी, अब आगे क्या होगा?

अमेरिका के टेनेसी में 1995 के हत्या मामले की दोषी क्रिस्टा पाइक को दो बार जहरीला इंजेक्शन देने के बाद भी सजा पूरी नहीं हो सकी

अमेरिका के टेनेसी राज्य में 30 सितंबर 2026 को मौत की सजा पाने वाली कैदी क्रिस्टा पाइक को दो बार जहरीला इंजेक्शन दिया गया, लेकिन इसके बाद वो अब भी ज़िंदा है.

इंजेक्शन दिये जाने के बाद स्ट्रेचर पर बंधी पाइक की धड़कन चलती रही और वह सोती रही। आखिरकार इस प्रक्रिया को रोकना पड़ा और पाइक को अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और राज्य में इस साल होने वाली सभी मौत की सजाओं पर रोक लगा दी है।

टेनेसी की जेल में बीते बुधवार रात क्रिस्टा पाइक को स्ट्रेचर पर बांधा गया। उस वक्त वह पूरी तरह होश में थी। अधिकारियों ने उसे ‘पेंटोबार्बिटल’ नामक घातक दवा का पहला इंजेक्शन दिया। नियम के मुताबिक इस दवा से नर्वस सिस्टम धीमा पड़ता है, सांस रुकती है और दिल धड़कना बंद हो जाता है।

लेकिन लगभग एक घंटे बाद भी पाइक की सांसें चल रही थीं। तय प्रोटोकॉल के अनुसार उसे पेंटोबार्बिटल की दूसरी खुराक दी गई। पाइक सो रही थी,  उसकी धड़कन चल रही थी।

इसके करीब आधे घंटे बाद अधिकारियों ने गवाहों को बाहर जाने के लिए कहा और माइक्रोफोन बंद कर दिए। पाइक के वकीलों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आपातकालीन याचिका दाखिल की, जिसके बाद इस पूरी प्रक्रिया को रोक दिया गया।

क्रिस्टा पाइक का केस 1995 के चर्चित हत्या मामलों में शामिल रहा है। जनवरी 1995 में 18 वर्ष की पाइक ने अपने बॉयफ्रेंड तादारिल शिप और एक साथी के साथ मिलकर अपनी 19 साल की सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या कर दी थी।

यह घटना नॉक्सविले स्थित जॉब कोर सेंटर के पास के जंगल में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, क्रिस्टा को संदेह था कि कोलीन उसके बॉयफ्रेंड के करीब आ रही है। तीनों ने मिलकर कोलीन पर हमला किया और उसे गंभीर चोटें पहुंचाईं।

वर्ष 1996 में अदालत ने पाइक को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। यदि बुधवार को यह प्रक्रिया पूरी हो जाती, तो टेनेसी राज्य में 1819 के बाद मौत की सजा पाने वाली वह पहली महिला कैदी होती।

मानसिक बीमारी और सजा पर कानूनी बहस

पाइक की कानूनी टीम और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से उसकी सजा का विरोध किया है। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, पाइक का बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता था और वह गंभीर मानसिक बीमारियों जैसे कि बाइपोलर डिसऑर्डर और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से पीड़ित रही है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी टेनेसी सरकार से अपील की थी कि अपराध के समय पाइक की कम उम्र और मानसिक स्थिति को देखते हुए उसकी सजा को उम्रकैद में बदला जाए। 30 साल जेल में बिताने के बाद पाइक ने अपने कृत्य पर पछतावा भी व्यक्त किया था।

दवा के निष्प्रभावी होने के कारण

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में इससे पहले भी नसों में सुई सही तरीके से न लग पाने के कारण सजा टालने के मामले आए हैं, लेकिन दवा शरीर में पहुंचने के बाद कैदी के जीवित रहने का यह दुर्लभ मामला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाइक के रक्त में पेंटोबार्बिटल की उतनी मात्रा नहीं पहुंची जो मृत्यु का कारण बन सके। पाइक के वकीलों का कहना है कि नसों की पहचान में दिक्कत आई थी या इस्तेमाल की गई दवा की प्रभावकारिता कम हो चुकी थी।

इसके अलावा, टेनेसी के दिशानिर्देशों में यह उल्लेख तो है कि पहला इंजेक्शन विफल होने पर दूसरा दिया जाए, लेकिन दूसरे इंजेक्शन के बाद भी कैदी के जीवित रहने की स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाए, इस पर नियम स्पष्ट नहीं हैं।

 अब आगे क्या होगा, क्या सजा बरकरार रहेगी

इस  घटना के बाद अमेरिकी कानूनी तंत्र और टेनेसी राज्य के सामने कई बड़े संवैधानिक व कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। क्या क्रिस्टा पाइक दी गई मौत की सजा तकनीकी और कानूनी तौर पर अभी भी प्रभावी रहेगी या नहीं ।

एपी समाचार एजेंसी के मुताबिक़, राज्य के मौत की सज़ा संबंधी प्रोटोकॉल में यह साफ़ नहीं बताया गया है कि अगर किसी कैदी को दूसरी खुराक देने के बाद भी वह ज़िंदा रहता है तो क्या किया जाना चाहिए।

टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने पाइक के मामले और राज्य में होने वाली बाकी सभी मौत की सजाओं पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं।

गवर्नर ली ने कहा, “कानूनी तौर पर दी गई सज़ा को लागू करना राज्य की सबसे गंभीर ज़िम्मेदारियों में से एक है, और टेनेसी के लोग उम्मीद करते हैं कि यह काम ऐसे तरीके से किया जाए जो न केवल कानूनी और संवैधानिक हो, बल्कि असरदार भी हो।” उन्होंने यह भी कहा कि वह  पाइक की नाकाम फांसी की प्रक्रिया की “व्यापक, तीसरे पक्ष द्वारा समीक्षा” का आदेश दे रहे हैं।

वैसे अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 1947 के ऐतिहासिक फैसले के पर नज़र डाले, यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण सजा विफल होती है, तो राज्य दोबारा सजा देने का प्रयास कर सकता है।

हांलकी, अमेरिकी संविधान का आठवां संशोधन कैदियों को ‘क्रूर और असामान्य सजा’ से सुरक्षा देता है। पाइक के वकीलों का तर्क है कि उसे दो बार विफल इंजेक्शन देना शारीरिक और मानसिक यातना के समान है, इसलिए तीसरी बार प्रयास करना असंवैधानिक होगा।

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