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गाज़ा का दर्द दिखाने वाली फिल्म ‘NAZA’ वेनिस फिल्म फेस्टिवल में छाई, 25 मिनट तक बजती रही तालियां

इटली के ऐतिहासिक शहर वेनिस में चल रहे ‘वेनिस फिल्म फेस्टिवल 2026’ में एक इजराइली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ने वैश्विक सिनेमा और कूटनीतिक हलकों में बड़ी बहस छेड़ दी है।

ऑस्कर विजेता इजराइली फिल्ममेकर्स युवल अब्राहम और रेचल जोर की नई डॉक्यूमेंट्री ‘नाज़ा’ (NAZA) के प्रीमियर के बाद सिनेमाहॉल का माहौल पूरी तरह से भावुक हो गया।

स्क्रीनिंग खत्म होते ही ऑडिटोरियम में मौजूद दर्शकों और दुनिया भर से आए फिल्म क्रिटिक्स ने खड़े होकर लगातार 25 मिनट तक तालियां बजाईं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह वेनिस फिल्म फेस्टिवल के इतिहास में अब तक का सबसे लंबा ‘स्टैंडिंग ओवेशन’  माना जा रहा है। इससे पहले यह रिकॉर्ड फिल्म ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ (The Voice Of Hind Rajab) के नाम था, जिसे 23 मिनट की सराहना मिली थी।

रेड कार्पेट पर कूटनीतिक नारों की गूंज

फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले ही वेनिस का माहौल काफी तनावपूर्ण और राजनीतिक नारों से भरा नजर आया। जब दोनों इजराइली डायरेक्टर्स युवल अब्राहम और रेचल जोर रेड कार्पेट पर पहुंचे, तो वहां मौजूद भीड़ दो हिस्सों में बंटी दिखी। एक तरफ जहां ‘फ्री फलस्तीन’  के नारे लग रहे थे, वहीं दूसरी ओर ‘फ्री इजरायल’ के समर्थन में भी आवाजें उठाई गईं।

हालांकि, किसी भी फिल्म के असर को आंकने के लिए स्टैंडिंग ओवेशन कोई आधिकारिक पैमाना नहीं होता, लेकिन सिनेमा जगत के जानकारों का कहना है कि 25 मिनट का यह रिस्पॉन्स दिखाता है कि फिल्म ने गाजा के दर्द को किस गहराई से पर्दे पर उतारा है। ‘नाज़ा’ को इस साल वेनिस फिल्म फेस्टिवल के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

 ‘NAZA’ का मतलब और इसकी कहानी?

फिल्म का शीर्षक ‘NAZA’ इजराइली रक्षा बलों (IDF) के अंदर इस्तेमाल होने वाले एक गुप्त मिलिट्री कोड/शॉर्ट-फॉर्म से लिया गया है। इस शब्द का इस्तेमाल इजराइली सेना की उन फाइलों और घटनाओं के लिए किया जाता है, जहां सैन्य कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों (जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं) की मौत या गंभीर चोट की पुष्टि होती है।

यह डॉक्यूमेंट्री गाजा युद्ध के दौरान आम फलस्तीनी नागरिकों की मौत और इजराइली सेना की कथित रणनीतियों पर बेहद बेबाकी से रोशनी डालती है।

फिल्म की शूटिंग पिछले तीन सालों के दौरान तेल अवीव की अलग-अलग छतों और गुप्त स्थानों पर की गई। फिल्म में इजराइली सेना और इंटेलिजेंस  से जुड़े 24 से अधिक अधिकारियों और सैनिकों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए हैं।

गोपनीयता और सुरक्षा के मद्देनजर फिल्म में नजर आने वाले सैन्य अधिकारियों के चेहरों और आवाजों को डिजिटल रूप से बदला गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डायरेक्टर युवल अब्राहम ने बताया कि उन्होंने सैनिकों से केवल यह कहा था कि वे बिना किसी झिझक के वह सच बताएं जो उन्होंने वहां किया और देखा। सैनिकों द्वारा दिए गए नक्शों और ब्यौरे से ही गाजा युद्ध के अंदरूनी ढांचे का स्केच तैयार हुआ।

फिल्म निर्माता रेचल जोर के मुताबिक, ‘नाज़ा’ केवल प्रत्यक्षदर्शियों के साक्षात्कारों तक सीमित नहीं है। इस फिल्म का आधार इजराइली-फलस्तीनी मीडिया आउटलेट ‘+972 Magazine’, ‘Local Call’ और अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र ‘The Guardian’ की 2023 से 2025 के बीच की गई इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स हैं। फिल्म का मकसद पहले से पब्लिश हो चुकी खबरों को एक मजबूत विजुअल और मानवीय रूप देकर दुनिया के सामने लाना था।

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