इरफान पठान 27 अक्टूबर को 42 साल के हो गए। कप्तान सौरव गांगुली उन्हें टीम में ही नहीं चाहते थे, जावेद मियांदाद ने उन्हें ‘गली का गेंदबाज’ कहा था और फिर कराची में वही गेंदबाज टेस्ट इतिहास का वो कारनामा कर गया, जो आज तक कोई दूसरा नहीं दोहरा पाया। फिर भी इरफान उस मैच को याद नहीं करना चाहते। वजह दिलचस्प है।
बात 2003-04 की है। भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जा रही थी। दिग्गज गेंदबाज जहीर खान चोटिल थे और टीम में 19 साल के एक बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को जगह मिली, जिसकी स्विंग की चर्चा क्रिकेट के गलियारों में खूब हो रही थी। नाम था – इरफान पठान।
बहुत कम लोग जानते हैं कि इरफान तब के कप्तान सौरव गांगुली की पसंद थे ही नहीं। यह खुलासा खुद इरफान ने किया था।
जिसे कप्तान टीम में नहीं चाहता था
इरफान के मुताबिक दौरे के आखिर में गांगुली खुद उनके पास आए और कहा – ‘शायद तुम्हें पता न हो, लेकिन मैं तुम्हें इस दौरे की टीम में नहीं चाहता था। चयन बैठक में मैंने मना कर दिया था। ऐसा इसलिए नहीं कि मैंने तुम्हारी गेंदबाजी देखी थी, बल्कि मैं ऑस्ट्रेलिया जैसे बेहद कठिन दौरे पर किसी 19 साल के लड़के को नहीं ले जाना चाहता था।’
गांगुली ने साथ में यह भी माना था कि इरफान को खेलते देखने के बाद उन्हें यकीन हो गया कि वे गलत थे। इरफान कहते हैं कि किसी कप्तान का खुद आकर अपनी गलती मानना उन्हें हैरान कर गया था और दादा के लिए उनका सम्मान और बढ़ गया था।
मैदान पर भी इरफान ने कप्तान को गलत साबित किया। टेस्ट में विकेट भले सिर्फ 4 मिले, लेकिन सिडनी टेस्ट में उनकी अंदर आती यॉर्कर पर एडम गिलक्रिस्ट का बोल्ड होना आज भी क्रिकेट प्रेमियों को याद है। असली धमाका वनडे त्रिकोणीय सीरीज में हुआ – 10 मैचों में 16 विकेट, पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा। 19 साल का ‘अनचाहा’ गेंदबाज दौरे से भारत की सबसे बड़ी खोज बनकर लौटा।
मियांदाद का तंज़: ‘ऐसे गेंदबाज हमारी हर गली में हैं’
इसके बाद 2004 में भारत के पाकिस्तान दौरे से पहले पाकिस्तान के कोच जावेद मियांदाद ने कहा था – तुम्हारे इरफान पठान जैसे गेंदबाज तो पाकिस्तान की हर गली-मोहल्ले में मिल जाते हैं, हम उनकी तरफ देखते तक नहीं।
दो साल बाद इसी ‘गली के गेंदबाज’ ने पाकिस्तान की धरती पर जो किया, उसका जवाब आज तक कोई नहीं दे पाया।
पहले ओवर में ऐतिहासिक हैट्रिक
सीरीज के पहले दो टेस्ट ड्रॉ रहे थे। तीसरा और निर्णायक टेस्ट कराची के नेशनल स्टेडियम में था। कप्तान राहुल द्रविड़ ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। पाकिस्तान की तरफ से सलमान बट क्रीज पर थे और गेंद इरफान पठान के हाथ में।
पहली तीन गेंदें खाली गईं। चौथी गेंद बाहर की तरफ स्विंग हुई, बट के बल्ले का किनारा लिया और पहली स्लिप में खड़े द्रविड़ के हाथों में समा गई। स्कोर 0 पर 1।
अगली गेंद अंदर आई और यूनुस खान पैड पर फंस गए — LBW। स्कोर 0 पर 2।
ओवर की आखिरी गेंद फिर अंदर घुसी और मोहम्मद यूसुफ के स्टंप उखड़ गए। हैट्रिक। स्कोर 0 पर 3। इरफान ने पारी में कुल 5 विकेट (5/61) लिए और पाकिस्तान एक समय 39 रन पर 6 विकेट गंवाकर ढहने की कगार पर था।
टेस्ट क्रिकेट के 129 साल के इतिहास में मैच के पहले ही ओवर में हैट्रिक लेने वाले इरफान पहले गेंदबाज बने — और 20 साल बाद भी यह रिकॉर्ड अकेला खड़ा है। भारत की तरफ से वे हरभजन सिंह (2001) के बाद टेस्ट हैट्रिक लेने वाले सिर्फ दूसरे गेंदबाज थे।
फिर भी इस मैच को याद क्यों नहीं करना चाहते पठान?
क्योंकि वह मैच भारत हार गया था वो भी बुरी तरह।
39 पर 6 के बाद विकेटकीपर कामरान अकमल ने 113 रन की जवाबी पारी खेलकर पाकिस्तान को 245 तक पहुंचा दिया। कम लोग जानते हैं कि 80 रन पर अकमल को एक बार स्टंपिंग करने से महेंद्र सिंह धोनी से चूक हो गई थी, वह चूक मैच की तस्वीर बदल गई। भारत पहली पारी में 238 पर सिमट गया, जिसमें युवराज सिंह (45) के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्कोर खुद इरफान का था – 40 रन। दूसरी पारी में पाकिस्तान ने 599/7 का पहाड़ खड़ा कर दिया (फैसल इकबाल 139, मोहम्मद यूसुफ 97) और 607 रन के लक्ष्य के सामने भारत 265 पर ढेर हो गया। हार का अंतर था 341 रन।
इरफान के मुताबिक ड्रेसिंग रूम में सचिन तेंदुलकर ने उनसे पूछा था कि क्या उन्हें पता है कि यह विश्व रिकॉर्ड है, और उनका जवाब था -‘नहीं पाजी, मुझे कोई आइडिया नहीं था।’
इरफान कई इंटरव्यू में कह चुके हैं कि वे कराची टेस्ट पर ज्यादा बात नहीं करते। जब भी अपने करियर के खास लम्हों की बात होती है, वे 2007 के T20 वर्ल्ड कप फाइनल को आगे रखते हैं – जहां फाइनल में 3 विकेट लेकर वे मैन ऑफ द मैच बने थे और भारत चैंपियन बना था। विश्व रिकॉर्ड वाली हैट्रिक एक हारे हुए मैच की याद है, इसलिए वह जश्न उन्हें अधूरा लगता है।
जब आखिरी जोड़ी के साथ पूरा किया पहला टेस्ट शतक
दिसंबर 2007 की बात है बेंगलुरु में भारत और पाकिस्तान का मैच खेला जा रहा था। इरफान एक साल से ज्यादा समय बाद टेस्ट टीम में वापसी कर रहे थे। सौरव गांगुली (239) के साथ सातवें विकेट के लिए उन्होंने 178 रन जोड़े। जब वे 96 पर थे, तो दूसरे छोर पर आखिरी बल्लेबाज इशांत शर्मा खड़े थे — एक विकेट गिरा और शतक अधूरा रह जाता। इरफान ने दानिश कनेरिया को छक्का लगाकर अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया — 133 गेंदों में 102 रन, 10 चौके और 4 छक्के।
जब पहला मैन ऑफ द मैच मिला
दिसंबर 2004 में ढाका का मैदान। बांग्लादेश के खिलाफ इरफान ने पहली पारी में 5/45 और दूसरी में 6/51 लिए — मैच में कुल 11 विकेट (11/96)। यह किसी भारतीय तेज गेंदबाज का विदेशी धरती पर उस समय का दुर्लभ कारनामा था और इरफान को पहला टेस्ट मैन ऑफ द मैच मिला। उम्र तब सिर्फ 20 साल थी। दिलचस्प है कि उसी मैच में सचिन तेंदुलकर ने 248 नाबाद रन बनाकर गावस्कर के 34 शतकों के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी — सुर्खियां सचिन ले गए, मैच इरफान ने जिताया।

अब कहां हैं इरफान?
इरफान ने भारत के लिए आखिरी मैच अक्टूबर 2012 में, सिर्फ 27 साल की उम्र में खेला था। उनका अपना कहना है कि ज्यादातर खिलाड़ी 27-28 की उम्र में करियर शुरू करते हैं, उनका खत्म हो गया – यह मलाल उन्हें हमेशा रहा। 4 जनवरी 2020 को उन्होंने 35 साल की उम्र में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। आज वे हिंदी कमेंट्री पैनल की प्रमुख आवाजों में से एक हैं, जहां उनके साथ आकाश चोपड़ा, सुनील गावस्कर और दिनेश कार्तिक जैसे नाम होते हैं।
मैदान से दूर, लेकिन ‘गली के गेंदबाज’ का वह पहला ओवर आज भी हर क्रिकेट प्रेमी की याद में वैसा का वैसा ताजा है।