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क्या है अल-नीनो जिसके बारे में WMO ने दी है चेतावनी, भारत पर क्या होगा इसका असर

WMO के अनुसार मध्य-पूर्वी प्रशांत महासागर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे एक बेहद ताकतवर यानी 'सुपर अल-नीनो' का खतरा पैदा हो गया है।

प्रशांत महासागर की गहराइयों में एक ऐसी खामोश हलचल पक रही है, जिसका सीधा असर आपके और हमारे घर के मौसम पर पड़ने वाला है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा आंकड़ों ने जलवायु विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। मध्य-पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे एक बेहद ताकतवर यानी ‘सुपर अल-नीनो’ का खतरा पैदा हो गया है।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह असामान्य अल-नीनो अगले वर्ष फरवरी तक पूरी मजबूती के साथ बना रह सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले सात महीनों तक न तो ठंड का मिजाज सामान्य रहने की कोई गारंटी है और न ही बारिश के समय का।

क्या है अल-नीनो?

अल-नीनो एक ऐसी प्राकृतिक स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। जब समुद्र गर्म होता है, तो वह हवा के दबाव और दिशा को बदल देता है, जिससे पूरी दुनिया में मानसूनी हवाओं का संतुलन बिगड़ जाता है।

WMO के मुताबिक, मई से जुलाई के बीच प्रशांत महासागर के ‘नीनो-3.4’ क्षेत्र में तापमान सामान्य से 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। लेकिन असली खौफनाक तस्वीर समुद्र की सतह के नीचे है, जहाँ कुछ हिस्सों में पानी सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म पाया गया है। यही अतिरिक्त समुद्री गर्मी अल-नीनो को अभूतपूर्व ताकत दे रही है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अल-नीनो जिस रफ्तार से ‘सुपरसाइज़’ हो रहा है, उसने पूरी दुनिया को एक गंभीर ‘खतरे के क्षेत्र’ में धकेल दिया है।

भारत पर इसका क्या असर

आमतौर पर अल-नीनो भारत में सूखे या कम बारिश का कारण बनता है। इस बार भी इसका असर साफ देखने को मिला-भारत ने 1901 के बाद से सबसे गर्म अगस्त का महीना दर्ज किया, जहाँ मानसूनी बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम रही।

आने वाले महीनों में इसका असर और जटिल हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के अंतिम चरण में असमान बारिश देखने को मिल सकती है-कहीं सूखा पड़ेगा तो कहीं बहुत कम समय में भारी बारिश से अचानक बाढ़ के हालात बन जाएंगे।

केवल मानसून ही नहीं, बल्कि इस बार सर्दियों का मिजाज भी बिगड़ने की आशंका है। उत्तर भारत में ठंड के दिन छोटे हो सकते हैं और फरवरी आते-आते समय से पहले गर्मी दस्तक दे सकती है। हालांकि, हिंद महासागर में बन रहे ‘सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल’ (Positive IOD) से थोड़ी उम्मीद बाकी है, जो भारत में अल-नीनो के सूखे वाले असर को थोड़ा कम करने की ताकत रखता है।

क्या 2027 तोड़ेगा गर्मी के सारे रिकॉर्ड?

जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह महासागरीय पैटर्न इसी तरह बना रहा, तो यह 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली अल-नीनो साबित हो सकता है। 2024 को अब तक का सबसे गर्म साल दर्ज किया गया था, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो के चरम पर पहुँचने के बाद वैश्विक तापमान में जो उछाल आएगा, वह 2027 को इतिहास का सबसे गर्म साल बना सकता है।

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