सड़क पर हुई एक छोटी सी कार दुर्घटना किसी की जिंदगी का सबसे बुरा दिन हो सकती है, लेकिन बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसा हादसा भी दर्ज है जिसने एक स्ट्रगलिंग एक्टर को रातों-रात देश का सबसे चर्चित विलेन बना दिया। यह किस्सा है दिग्गज अभिनेता शक्ति कपूर का, जिन्हें 80 के दशक में पहचान पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही थीं।
वो मर्सिडीज जिसकी टक्कर ने शक्ति की संवार दी किस्मत
संघर्ष के दिनों में शक्ति कपूर जैसे-तैसे अपना गुजारा चला रहे थे। एक कैलेंडर फोटोशूट से उन्हें कुछ पैसे मिले, तो उन्होंने बेहद चाव से 11 हजार रुपये में एक पुरानी फिएट कार खरीदी। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह पुरानी कार उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित होने वाली है।
एक दिन शक्ति कपूर मुंबई के बांद्रा स्थित लिंकिंग रोड पर अपनी फिएट चला रहे थे। अचानक पीछे से आई एक तेज रफ्तार मर्सिडीज ने उनकी कार में टक्कर मार दी। टक्कर के बाद मर्सिडीज उनके ठीक आगे आकर रुकी। शक्ति कपूर आगबबूला हो गए—उनके पास न तो खाने के पैसे थे और न ही कार की मरम्मत कराने की हैसियत। गुस्से में तिलमिलाते हुए वे अपनी कार से बाहर निकले ताकि मर्सिडीज वाले को खरी-खोटी सुना सकें।
लेकिन जैसे ही मर्सिडीज का दरवाजा खुला और उससे 6.2 फीट लंबे, चश्मा पहने और पूरी दबंगियत के साथ एक शख्स बाहर निकला, शक्ति कपूर का सारा गुस्सा एक पल में हवा हो गया। सामने कोई साधारण ड्राइवर नहीं, बल्कि उस दौर के सबसे स्टाइलिश एक्टर-डायरेक्टर फिरोज खान खड़े थे।
फिरोज खान को देखते ही शक्ति कपूर का मूड लड़ाई से सीधे ‘काम मांगने’ पर आ गया। वे फिरोज खान के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए और बोले, “सर, मेरा नाम शक्ति कपूर है। मैं एफटीआईआई (फिल्म इंस्टीट्यूट) से पास आउट हूँ। आपने इंडस्ट्री में कई नए चेहरों को मौका दिया है, डैनी सर को भी दिया है, प्लीज मुझे भी अपनी फिल्म में एक रोल दे दीजिए!”
फिरोज खान ने अपनी कार के डैमेज को देखा, शक्ति कपूर की तरफ घूरकर देखा और चिढ़ते हुए बोले, “अबे! तूने मेरी मर्सिडीज का क्या हाल कर दिया है और तुझे काम की पड़ी है?” इसके बाद फिरोज खान वहां से चले गए, लेकिन 22-23 साल के एक लड़के का बीच सड़क पर कार एक्सीडेंट के तुरंत बाद इस तरह काम मांगना उनके जेहन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
संघर्ष के दिनों में विनोद खन्ना ने दिया सहारा
यह हादसा उस दौर में हुआ था जब शक्ति कपूर आर्थिक तंगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे। हाल ही में डिजिटल चैनल अल्फा नियॉन स्टूडियोज को दिए एक इंटरव्यू में शक्ति कपूर ने अपने इस दौर के कई अनदेखे पन्ने खोले।
उन्होंने बताया कि उस समय वे सुपरस्टार विनोद खन्ना के घर पर बतौर पेइंग गेस्ट (PG) रह रहे थे। जब विनोद खन्ना को पता चला कि शक्ति कपूर के पास किराया देने तक के पैसे नहीं हैं, तो उन्होंने दरियादिली दिखाते हुए शक्ति कपूर को जुहू स्थित अपना एक खाली मकान रहने के लिए दे दिया, ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने करियर पर ध्यान दे सकें।
‘कुर्बानी’ फिल्म से रातों-रात बदली दुनिया
फिरोज खान अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘कुर्बानी’ (1980) की कास्टिंग कर रहे थे। फिल्म में मुख्य विलेन ‘विक्रम’ के किरदार के लिए वे किसी नए और दमदार चेहरे की तलाश में थे। तभी उन्हें लिंकिंग रोड पर अपनी मर्सिडीज से टकराने वाला वही जुनूनी लड़का याद आया। फिरोज खान ने तुरंत अपनी टीम को उस लड़के को ढूंढकर लाने को कहा।
शक्ति कपूर को जब फिरोज खान के ऑफिस से बुलावा आया, तो उन्हें अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ। उन्हें फिल्म ‘कुर्बानी’ में ‘विक्रम’ का अहम किरदार मिला। जब 1980 में ‘कुर्बानी’ रिलीज हुई, तो इसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। फिल्म के गाने, एक्शन और स्टाइल ने पूरे देश में तहलका मचा दिया।
फिल्म में फिरोज खान और विनोद खन्ना जैसे दिग्गजों के सामने शक्ति कपूर ने अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि इंडस्ट्री को एक नया, खौफनाक और स्टाइलिश विलेन मिल गया।
शक्ति कपूर खुद मानते हैं कि ‘कुर्बानी’ ही वह फिल्म थी जिसने उन्हें पहचान और स्टारडम दिया। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। इसके बाद 1983 में आई ‘हीरो’ और ‘रॉकी’ जैसी फिल्मों ने एक विलेन के रूप में उनकी स्थिति को और मजबूत किया। आगे चलकर उन्होंने ‘अंदाज अपना अपना’, ‘राजा बाबू’ और ‘टॉSubject’ जैसी फिल्मों में कॉमेडी से भी लोगों को अपना दीवाना बनाया।
लेकिन इस शानदार सफर की नींव उसी दिन रखी गई थी, जब बांद्रा की सड़क पर 11 हजार की फिएट मर्सिडीज से टकराई थी। अगर वह एक्सीडेंट न होता, तो शायद बॉलीवुड को अपना एक सबसे पसंदीदा कलाकार इतनी जल्दी नहीं मिलता।






